Dyatlov Pass Incident : रूस (Russia) की एक ऐसी पहाड़ी, जहां पर 9 लोग एक ऐसी रहस्यमयी घटना के शिकार हुए जिसका आज तक कोई ठोस प्रमाण नहीं मिल पाया। जब खोजी दल उन्हें ढूंढने यूराल पर्वत पर गये तो उन्हें हड्डी कंपा देने वाले बर्फीले तूफान के बीच उन्हें ऐसी हालत में देखा जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। खोजी दल ने उन्हें खोज तो लिया था, लेकिन उनकी मृत्यु हो चुकी थी। उन 9 लोगों के मृत शरीर का इतना बुरा हाल था कि कोई इस दर्दनाक घटना की कल्पना भी नहीं कर सकता। आज हम रूस की उस रहस्यमयी पहाड़ी की वही दर्दनाक कहानी बताएंगे, डायलतोव पास घटना (Dyatlov Pass Incident) जो आपको भी सोचने पर मजबूर कर देगी कि क्या सच में ऐसा भी हो सकता है!
Dyatlov Pass Incident in Hindi: 10 दोस्तों और उनका खतरनाक मिशन
यह रहस्यमयी सफर की शुरुआत 10 दोस्तों द्वारा साल साल 1959 में की गई थी । ये सभी हायकर्स पढ़ने वाले छात्र थे , जो हाइकिंग और ऊंचे–ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ना इनका बहुत शौक था । रूस की यूरल पॉलीटेक्निक इंस्टीट्यूट में रेडियो इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले एक छात्र जिनका नाम इगोर दयातलोव (Igor Dyatlov) था । दयातलोव, जिनकी उम्र 23 साल की थी वे पढ़ाई में एक होनहार छात्र थे । पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें ऊंचे और खतरनाक पहाड़ों पर घूमना बहुत पसंद था । वे कई बार ऐसी खतरनाक जगहों पर जा चुके थे जिस कारण उन्हें अच्छा खासा अनुभव भी हो गया था ।
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दयातलोव के नेतृत्व में सभी लोग अपने बेस कैंप की ओर चल दिए । इस सफर में कुल दस लोग थे जिनमें 8 पुरुष और 2 महिला थी । जब वहां सभी लोग इकठ्ठा हुए और आगे जाने की योजना बना रहे थे क्योंकि उन्हें अपना पहला पड़ाव ओटोर्तेन’ (Otorten) पर्वत तक पहुंचना था । इस पर्वत को वहां के स्थानीय लोग अपनी भाषा में वहां मत जाओ कहा करते थे । सभी हाइकर्स धीरे–धीरे आगे बढ़ने लगे । जब वे पहाड़ी के नजदीक रिहायशी इलाके के एक छोटे से गांव जिसका नाम विजाय (Vizhai) था वहां वे रुकते है और थोड़ा आराम करने लगते हैं ।
जब हाइकर्स आराम कर अपने आगे की सफर पर जाने के लिए तैयार होने लगे तो उनमें से एक युवक जिनका नाम यूरी युडिन (Yuri Yudin) था उनकी तबियत खराब हो गई । बुखार सिरदर्द के कारण उनको लगा कि वह अब इस मिशन के लिए परफेक्ट नहीं है । अतः अपनी अस्वस्थता को देखते हुए यूरी युडिन (Yuri Yudin) ने वहां से वापस आने का निर्णय लिया । इगोर दयातलोव कि टीम जिसमें 9 लोग थे उस खतरनाक सफर पर आगे बढ़ चले । उन्होंने कई छोटी पहाड़ियों और जंगलों को पार किया लेकिन ,अभी वे वहां नहीं पहुंचे जहां उनके साथ अजीबो गरीब हादसा हुआ ।
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हाइकर्स की अंतिम यात्रा
इगोर दयातलोव अपने साथियों के साथ धीरे–धीरे अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ रहे थे । रास्ते में बड़े–बड़े पत्थर और विशालकाय पेड़ो के नीचे चलना उन सभी के लिए एक चुनौती थी । क्योंकि अंधेरा होने वाला था और बाहर मौसम भी ठंडा था वे धीरे धीरे ऊपर पहाड़ की ओर आगे बढ़ने लगे सर्द हवाएं शरीर में सिहरन पैदा कर रही थी ।
जिस रहस्यमयी पहाड़ पर वे आगे बढ़ रहे थे उसका नाम खोलात श्याखल ( Kholat Syakhl ) था । इसको मृतकों का पहाड़ भी कहा जाता है । चलते चलते रात हो गई थी और सभी लोग थक भी गए थे तापमान गिरने के कारण शरीर काम भी करना बंद कर दिया था । इन परस्थिति को देखते हुए सभी हाइकर्स पहाड़ के एक ढलान पर अपनी टेंट लगाने का फैसला करते है । दयातलोव और उनकी टीम जब इस पहाड़ों के रहस्यमयी सफर पर चले थे तो उनको ये हिदायत दी गई थी कि ,12 फरवरी तक वे बेस कैंप पहुंचकर वापस सकुशल लौटने की सूचना दे । शायद उनकी टीम को ये मालूम नहीं था कि जिस सफर पर वो जा रहे है वह उनके साथ क्या घटित होने वाली है ।
जब दयातलोव और उनकी टीम द्वारा बेस कैंप पर निश्चित समय द्वारा कोई सूचना नहीं आया तो उनके साथियों ने ये सोचा कि कुछ दिन में आ जायेंगे । उन्हें लगा कि पहाड़ों में सफर के दौरान समय ज्यादा लग गया होगा । लेकिन जब ज्यादा समय बीत गया न कोई खोज न खबर तो हाइकर्स के परिवार वालों को चिंता हुई । उन्होंने इस खतरनाक मिशन के बारे में पुलिस को बताया । जब इन सभी खतरनाक मिशन के बारे में पुलिस को मालूम हुआ तो उन्होंने तुरंग एक खोजी दल की टीम को रेस्क्यू मिशन पर भेज दिया ।
बर्फ में ढका हैरान करने वाला नजारा
रूस की यूरल पर्वत के एक निकट एक पहाड़ी जिसका नाम खोलात श्याखल था । रेस्क्यू टीम जब पहाड़ पर पहुंची तो उनका नजर उस मृत पहाड़ी के एक संकीर्ण ढलान पर पड़ी । उन्होंने वहां देखा कि बर्फ में दबी हुई एक टेंट है जिसका आधा हिस्सा बर्फ से ढका हुआ है ।
खोजी दल जब टेंट के नजदीक गए तो उन्होंने अंदर देखा कि टेंट अंदर से फटी हुई है ऐसा लग रहा था कोई उसे चाकुओं या नुकीले नाखून से फाड़ दिया हो । आश्चर्य की बात ये थी कि टेंट में किसी की लाशे नहीं थी । लेकिन अंदर का सामान सभी वैसे ही पड़ा हुआ था । प्लेट में खाने का सामान और पास में वोदका आदि था । इस स्थिति को देख कर ऐसा लग रहा था कि टेंट में रहने वाले लोग खाना खाने वाले थे और उनके साथ कुछ ऐसा घटना हुआ जिससे वे अपने भोजन छोड़कर तुरंत बाहर भागे हो ।
खोजी दल ने जब लाशों को ऐसी हालत में देखा
जब खोजी दल को टेंट के आस–पास किसी भी हाइकर्स की लाश नहीं मिली तो वो निराश हो गए । वे लोग सोचने लगे कि वो लोग आखिर यहाँ से कहा गायब हो गए होंगे । फिर अचानक उनमें से एक साथी की नजर बर्फ पर पड़ी एक निशान पर पड़ी । वह निशान खाली पैर या फिर एक जूते के हो सकते है । उन्होंने धीरे–धीरे निशान का पीछा किया , जब वे करीब एक किलोमीटर तक आगे जंगल की ओर आगे बढ़े तो उन्हें कुछ जलने के निशान मिले ।
ठीक पास में देवदार का पेड़ था उसके नीचे दो लोगों का मृत शरीर मिला । उनके शवों को देखकर लग रहा था कि उनके सीने पर बहुत गंभीर चोट लगी होगी । धीरे धीरे सभी को लाशे आस पास मिलने लगी एक का तो हाथ पर बहुत बड़ा जख्म था ऐसा लग रहा था कि उसकी एक हाथ को कोई दांतों या नुकीले चीजों से काटा है । बाकी बचे लोगों में दो लोगों की आँखे गायब थी तथा एक महिला की जीभ कटी हुई हालत में मिली । शवों के इस डरावने मंजर को देखकर कोई कुछ सही अंदाजा नहीं लगा पा रहा था कि इनके साथ आखिर में हुआ क्या होगा ।
डायटलोव पास एक रहस्यमयी पहेली
इस घटना को बीते हुए बहुत साल बीत गए , रूसी सरकार ने इसे प्राकृतिक आपदा या हिमस्खलन से घटित घटना का हवाला देते हुए फाइल बंद करने की कोशिश की । लेकिन कपड़ों पर मिले रेडिएशन और शवों के अंतिम संस्कार के समय उनका शरीर नारंगी होना । एक बार दुनिया में कई सवालों को जन्म दिया ।
साल 2020 में फिर इस घटना से संबंधित जांच शुरू हुई , कई फॉरेंसिक एक्सपर्ट और वैज्ञानिकों के रिपोर्ट संतोषजनक नहीं था ।
उन्होंने बस यह अंदाजा लगा पाए कि पहाड़ों से कोई भरी बर्फ का टुकड़ा टेंट पर गिरा होगा जिसमें वे लोग दब गए होंगे। और जहां तक उनके शरीर के अंग गायब होना , पूरे शरीर पर घाव वह किसी जानवर का काम हो सकता है ।
आज भले ही मृतकों के पहाड़ पर हुई घटना की फाइल सोवियत सरकार ने बंद कर दिया हो , लेकिन यह घटना
आज भी एक रहस्यमयी पहेली बनी हुई है ।
निष्कर्ष –
डायटलोव पास की घटना जिसमें 9 हाइकर्स की रहस्यमयी मौत ने दुनिया में हलचल मचा दिया । आज भी इस घटना का कोई साफ निष्कर्ष नहीं निकला कि , वे सभी हाइकर्स प्राकृतिक आपदा का शिकार हुए या कुछ और कारण था । इस घटना से एक बात तो समझ आती है कि इंसानी दिमाग कितना भी कुछ कर ले लेकिन कुछ ऐसी अलौकिक शक्तियां है जिसे जन पाना इंसान और विज्ञान के बस में भी नहीं है ।
खैर डायटलोव पास की घटना ( Dyatlov Pass Incident ) के बारे में आपकी क्या राय है । अगर यह पोस्ट पढ़कर अच्छा लगा होगा तो आप कमेंट करके अपनी राय जरूर दे । धन्यवाद
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