बंदरो में भी कसक होती है

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बंदरो में भी कसक होती है

 

Interesting Information about Monkey : प्रेम करुणा मे वह शक्ति होती है वह आदमी तो केवल आदमी है यहा तक की जानवरो में भी देखने को मिलती है।बंदर एक प्रकार का चंचल प्राणी होता है ।
लेकिन इन बंदरो में भी कसक होती है।जब बंदर एक जानवर है तो वह और जानवरो से अलग क्यों होता है क्यो कभी-कभी देखा जाता है कि बंदर को मनुष्य के तरह व्यवहार करते हुए।आखिर में जानवर तो जानवर होता है हम सब जानते है कि जानवरो में भी प्रेम भाव होता है परन्तु यह क्षणिक मात्र तक रहता है लेकिन बंदरो में कसक, प्रेम,करुणा, यह स्वभाव ज्यादा क्यो देखने को मिलता है तो आईए कुछ उदारण देखते है।

बंदर


बंदर को एक बुुद्धीमान प्राणी माना जाता है क्योंकि इनकी ज्यादातर भावनांए इंसान से मिलती जुलती है
आपने बंदरो को देखा होगा कि वह कितने शरारती और फुर्तीले होते है लेकिन क्या आपने कभी यह देखा है कि अगर बंदर का साथी अगर घायल हो जाता है या मर जाता है तो बंदर कितना दुखी होता है
बंदर अपने साथी को मरने के बाद भी छोड़ने को तैयार नही होता है वह घंटो भर अपने साथी के उठ खड़ा होने की प्रतिछा करता रहता है। इस दृश्य को देखकर या समझ कर यह स्पष्ट होता है कि बंदरो में भी मनुष्यो जैसी शोक संबेदना होती है क्योकि उनका  भी अपने साथी के साथ वैसे ही प्रेमभाव रहता है जैसे मनुष्यो की होती है अत: यह भी कहा जा सकता है कि मनुष्य और बंदर की कसक की भावनाएं कुछ मिलती जुलती है।
आपने कभी देखा होगा की रोड के किनारे किसी कारण वश कोई बंदर की मृत्यु हो जाती है तो बंदर की भीड़ इकट्ठा हो जाती है। तथा उनके जमा हुए भीड़ कैसे उत्पात मचाते रहते है।अपनी साथी के जिंदा खड़ा करने के लिए वे मरे हुए बंदर को स्पर्श करते है ऐसा लगता है कि मानो वह कहते है कि चल उठ जा,और चल हमारे साथ उन पेड़ो के उपर जहा हमारा घर है,जहा पर हम साथ रहते है। अत:उनकी यही संवेदना को देखकर यही प्रतीत होता है की उनमे भी कसक होती है। वह भी मातम मनाते है घंटो साथी की प्रतिक्षा करते हैं । इस बात से निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि बंदर जानवर होकर भी अपने साथी के लिए स्नेहपूर्ण भावना का परिचय देते है।हलॉकि बंदरो के इन गुणो से मनुष्य की तुलना नही किया जा सकता है इसका कारण कुछ और भी हो सकता है। क्या पता कि इन  प्राणियो के समछ कई बार उनके साथी की मृत्यु हुई हो या यह कह सकते है कि किसी भी सामुहीक जानवरो समक्ष बार- बार कोई घटना घटित होती है तो थोड़ी बहुत वह भी समझ जाते है कि मृत्यु भी एक सत्य होती है तथा यही से भावना जागृत होती है।  उपरोक्त बातो से यह स्पष्ट होता है कि बंदर एक जानवर होते हुए भी वह मनुष्यो की तरह लगभग अपने साथी के प्रति संवेदना व्यक्त करता है उसको भी साथी के दुबारा ना लौटने की भावना समझ आ जाती है।इसलिए वह मरे हुए साथी के पास कई घण्टे तथा कई दिन तक प्रतिछा करते रहते है उसके उठ खड़ा होने की।लेकिन इस सत्य को वो भी जान लेते है कि वह वापस नही आने वाला है फिर भी उनके साथी के प्रति कसक उत्पन्न होती रहती है।

डिस्कलेमर- यह आर्टिकल  समान्य भावनात्मक अध्ययन के अधार पर लिखा गया है तथा इसका उद्देश्य किसी भी नियम और सिद्धांतो की अवहेलना करना नही है।

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